An essay on the 'Problems and Solution of Indian Agriculture' "भारत एक कृषि प्रधान देश है " अक्सर कृषि लेखों (Essays on Agriculture) की शुरुआत इसी वाक्य से होती है. ग्रंथों में कहा गया है ' अन्नम वै प्राणिनां प्राणः ' ( अन्न प्राणियों का जीवन है अर्थात प्राण है। प्राण ही जीवन एवं जीवन ही प्राण होता है। प्राण नहीं तो जीवन नहीं। ) और हमसब इस तथ्य से भली भांति परिचित हैं। अन्न को उगाने की कला का नाम ही कृषि है. कृषि एक विज्ञान है जिसमे फसल को उगाने से लेकर उसके बाज़ारीकरण तक का सूक्ष्म ज्ञान निहित है. इसी विज्ञानं को जानने, समझने और उसके व्यवहारिक प्रयोग का अनवरत साधना का काम करने वाले किसान कहलाते हैं। रोज़मर्रे की झंझावातों के साथ प्राकृतिक आपदाओं-विपदाओं से दो हाथ कर हमारे लिए दो वक़्त के निवाले का जुगाड़ करने वाले ये किसान हमारे समाज का अतिमहत्वपूर्ण अंग है। यूँ कहे की, हमारे जीवन की प्राणवायु शक्ति को चलायमान रखने के एक महत्वपूर्ण कारक को निष्ठापूर्वक पालन करनेवाले ये किसान है. राजनितिक व्यंग के लिए पढ़ें : हैप्पी बर्थडे मो...
