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Love vs Logic: Valentine Special – प्रेम का ‘बार्टर सिस्टम’ या सच्चा समर्पण

 

"एक चुम्मा तू मुझको उधार दे दे, और बदले में यूपी बिहार ले ले" गाने में उधार शब्द ऐसे ही उधार ले लिया होगा। बाकी उधार जैसा इसमें कुछ भी नहीं है। मतलब सीधा - एक चुम्मा दो और यूपी बिहार ले लो। नो उधारी, डायरेक्ट विनिमय - बार्टर सिस्टम। सरल समीकरण : 1 चुम्मा = यूपी + बिहार  

   गुलाबो का प्यार


बार्टर सिस्टम एक ऐसी विनिमय (लेन-देन) प्रणाली है जिसमें आवश्यकताओं का दोहरा संयोग होता है। यानी आपको एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढना होगा जिसके पास वह समान हो जो आपको चाहिए और उसे वह चाहिए जो आपके पास है। साफ-साफ शब्दों में समझें तो - दिल लेने की रुत आई, दिल देने की रुत आई। भई, आज के Gen-Z या कलयुगी प्यार के मूल में तो बार्टर सिस्टम ही है।


 जैसे 'तुम मुझे रोज गुड मॉर्निंग भेजो ; मैं तुझे आई लव यू भेजूंगा!

"मैं तुम्हारी फोटो पर कमेंट करूंगा ; तुम मेरी स्टोरी पर दिल वाला रिएक्शन दे दो !"


इस तरह के Give & Take Pvt. Ltd. प्रेम वाला स्टार्टअप अब तो यूनिकॉर्न बनता जा रहा है।


तत्कलीन समय में प्रेम सिर्फ देने का नाम नहीं रह गया है । यह एक द्विपक्षीय निवेश बन चुका है। जबकि, प्रेम में भावनात्मक लेनदेन का गणित है। यहां अनाज के बदले कपड़ा नहीं;  समय के बदले सम्मान, भरोसे के बदले सुरक्षा और धैर्य के बदले साथ का व्यापार होता है। जब एक साथी कहता है, 'मैं तुम्हारे सपनों का समर्थन करूंगा" तो उसे वह अवचेतन मन में  उम्मीद करता है कि कभी कठिन समय में उसे संबल मिलेगा। लेकिन आज प्रेम की मंडी के हर दुकान पर बोर्ड लगा दिखता है। 


"एक सरप्राइज के बदले दो तारीफ फ्री।"

सप्ताह, महीनों भर की नाराजगी माफ, अगर एक बढ़िया सा गिफ्ट साथ हो ! 


Gen-Z के इस डिजिटल वर्ल्ड में भावनायें एम.आर.पी. पर बिकने लगी हैं। मैंने तुम्हारे लिए इतना किया और तुमने.. मानो तो ये प्रेम नहीं कोई जी.एस.टी. का हिसाब किताब चल रहा हो.

बूढ़े-पुराने कहते हैं कि - असली प्रेम बार्टर सिस्टम नहीं, समर्पण है। जहाँ 'मैंने क्या पाया' से ज़्यादा 'मैंने क्या दिया' ज़्यादा मायने रखता है। जहाँ हिसाब नहीं, एहसास होता है। समर्पण का मतलब खुद को मिटाना नहीं वरन बिना शर्त निभाना है। प्यार बेशर्त होता है। इसमें निष्ठा होती है, वफादारी होती है, सम्मान होता है, सुरक्षा और भरोसे का एहसास होता है।

 प्रेम अगर व्यापार बन जाय तो रिश्ते भी शेयर मार्किट की तरह ऊपर नीचे होते रहेंगे। आज प्यार का सर्किट लगा , कल भाव गिर गए।

पर, यदि प्रेम समर्पण बन जाए, तो वह एक फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह होता है -- धीरे-धीरे बढ़ता है और समय के साथ मज़बूत होता है।

तो अगली बार जब आपका दिल कहे


-मैंने इतना किया, उसने क्या किया?

तो ,पहले मुस्कुराइए और फिर पूछिये


-यह प्रेम है या बार्टर सिस्टम !


क्योंकि असली प्रेम में कोई रसीद नहीं कटती, वहाँ दिल UPI की तरह नहीं, विश्वास की तरह जुड़ते है- हमेशा के लिए। सिर्फ भरोसे की मुहर लगती है और डील लाइफटाइम की। वहाँ तो बस दिल से दिल का डायरेक्ट ट्रांसफर होता है। बिना OTP, बिना प्रोसेसिंग फीस


#TheCynicalMind #LOVEvsLOGIC #ChandanGunjan #ValentineDay


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