चैत्र महीना का यह अनुपम संयोग ही है कि जहाँ एकतरफ मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, वहीँ दूसरी तरफ संकटमोचन महावीर भी हैं । हमारी भारतीय काल गणना के अनुसार चैत्र का महीना केवल नए संवत की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भक्ति और शक्ति के मिलन का साक्षी भी है। चैत का महीना बड़ा ही पावन है। कहते हैं भगवान ब्रह्माजी ने इसी चैत महीने में कॉस्मॉस के क्रिएशन की शुरुआत की थी यानी कॉस्मॉस जिसमें स्टार्स, प्लेनेट और टाइम.. यानि सृष्टि आरम्भ ... यह संयोग सच मे अद्भुत है कि जिस महीने में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने जन्म लिया, उसी महीने की पूर्णिमा को उनके सबसे प्रिय सेवक, संकटमोचन हनुमान जी का भी प्राकट्य हुआ। एक का 'नवमी', दूसरे का 'पूर्णिमा' चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथी को अयोध्या के राजभवन में राम लला का आगमन हुआ, तो ठीक छह दिन बाद पूर्णिमा के दिन केसरी नंदन हनुमान जी ने इस धरा पर अवतार लिया। एक तरफ वह तिथि है जब सूर्य अपनी उच्च राशि में होकर तपता है Ram Navmi, और दूसरी तरफ वह तिथि है जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ शीतलता प्रदान करता है (Hanuman Jayanti)। यह बतलाता ह...
आज एक महज़ संयोग ही है। एक तरफ राम नवमी है, उस मर्यादा पुरुषोत्तम का उत्सव जिसने हमें सीमाओं में रहकर जीना सिखाया। और दूसरी तरफ आज विश्व रंगमंच दिवस भी है, उस कला का जश्न जो हर सीमा को तोड़ने का दम रखती है। हम जैसे सिनिकल लोगों के लिए, यह जिंदगी अक्सर एक ऐसे ही नाटक जैसी लगती है जिसका डायरेक्टर गायब है और कलाकार बिना रिहर्सल के अपनी-अपनी लाइनें बोल रहे हैं। लेकिन शायद सार यही है। जीवन -मृत्यु पर लिखी एक मार्मिक कविता - मृत्यु आँखों के दरवाजे जब आप बंद करके देखेंगे तो पाएंगे कि राम एक मामूली किरदार नहीं वो असल में 'किरदार' की पराकाष्ठा हैं। उन्होंने इस नश्वर जगत में अपनी भूमिका एक बेटे, भाई, पति और राजा की इतनी शिद्दत से या बोलें तो ऐसे लीन होकर निभाई कि आज के शॉर्ट-टर्म कमिटमेंट और कैजुअल एप्रोच वाले दौर में वह नामुमकिन सा लगता है। मज़े की बात यह है कि उन्होंने अपनी लाइफ की स्क्रिप्ट को तब भी पवित्र माना, जब कहानी में उनके साथ नाइंसाफी हुई। वहीं, रंगमंच हमें याद दिलाता है कि पूरी दुनिया एक स्टेज है। हमारा प्यार, गुस्सा, हमारा भक्ति भाव, यहाँ तक कि हमारा यह...