‘ जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत ’ अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गिया गया यह मंत्र अक्सर ही कश्मीर में तथा कश्मीर से सम्बंधित बाटन में अक्सर अलापा जाता है और एक उदाहरण, “हिन्दू बहुल गाँव ने मुस्लिम शख्स को चुना पञ्च‘ विगत दिनों के पंचायत चुनावों में भद्रवाह शहर के एक हिन्दू बहुल गांव में जिसमे लगभग ४५० परिवारों में सिर्फ परिवार मुस्लिम है उस परिवार के चौधरी मोहम्मद हुसैन (५४ ) को निर्विरोध अपना पञ्च चुन लिया“ को कश्मीर की जमीनी सच्चाई बनाकर पेश किया जाता है . लेकिन हक़ीक़त क्या है? क्या जम्मू कश्मीर का इतिहास भी वही है जो आजकल के बड़बोले एलिट क्लास अक्सर पात्र-पत्रिकाओं , टीवी के चर्चाओं में करते हैं ? धरती का स्वर्ग , इंसानियत का दोज़ख़ (नर्क) बन चूका जम्मू -कश्मीर का एक ऐतिहासिक नजरिया भी है आइये उसको उसी के चश्मे से देखने का कोशिश करते हैं। इन्टरनेट के जन्मदाता टीम बर्नर्स ली ने किया चौकाने वाला ऐलान historical view of ammu-Kashmir- and its democracy इतिहास के नज़र में जम्मू-कश्मीर और उसका जम्हूरियत बात जम्हूरियत (De...