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Showing posts from 2018

इतिहास के नज़र में जम्मू-कश्मीर और उसका जम्हूरियत

  ‘ जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत ’   अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गिया गया यह मंत्र अक्सर ही कश्मीर में तथा कश्मीर से सम्बंधित बाटन में अक्सर अलापा जाता है और एक उदाहरण, “हिन्दू बहुल गाँव ने मुस्लिम शख्स को चुना पञ्च‘ विगत दिनों के पंचायत चुनावों में भद्रवाह शहर के एक हिन्दू बहुल गांव में जिसमे लगभग ४५० परिवारों में सिर्फ परिवार मुस्लिम है उस परिवार के चौधरी मोहम्मद हुसैन (५४ ) को निर्विरोध अपना पञ्च चुन लिया“ को कश्मीर की जमीनी सच्चाई बनाकर पेश किया जाता है . लेकिन हक़ीक़त क्या है? क्या जम्मू कश्मीर का इतिहास भी वही है जो आजकल के बड़बोले एलिट क्लास अक्सर पात्र-पत्रिकाओं , टीवी के चर्चाओं में करते हैं ? धरती का स्वर्ग , इंसानियत का दोज़ख़ (नर्क) बन चूका जम्मू -कश्मीर का एक ऐतिहासिक नजरिया भी है आइये उसको उसी के चश्मे से देखने का कोशिश करते हैं।     इन्टरनेट के जन्मदाता टीम बर्नर्स ली ने किया चौकाने वाला ऐलान historical view of ammu-Kashmir- and its democracy इतिहास के नज़र में जम्मू-कश्मीर और उसका जम्हूरियत    बात जम्हूरियत (De...

नेहरू पटेल की इस कहानी में छुपा है स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी पर सवाल उठाने वालों के जवाब

बात 2014 के आम लोकसभा चुनाव के पहले की है जब देश में एक अलग बयार चली थी। यह महज सिर्फ एक हवा का झोंका मात्र नहीं था वरन इसने एक झंझवात का रूप लिया जिससे कई दशकों की बनी बनाई एक मजबूत इमारत को गिरा दिया। और सबसे मज़े की बात यह थी कि इस इमारत के गिरते ही देश मे चहुओर एक अलग सी प्रकाश दिखाई दी। एक नई आशा की किरण ने देश हर वर्गों के लोगों में उत्साह और खुशियां भर दी। कई लोगों ने तो इसकी तुलना आज़ादी के वक़्त मिली चैन-सुकून से कर दी, बात भी कुछ हद तक सही ही थी। आज की बात इसी चुनावी बयार में चली एक संकल्प की करंगे जो आज चार साल बाद फिर सुर्खियों में है। बात है 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' की। जिस ' स्टेच्यू ऑफ यूनिटी ' का बखान करते मीडिया और देश के  लोग अघाते नहीं थे, जिसकी तुलना अमेरिका के स्टेच्यु ऑफ लिबर्टी से भी कई अर्थों में हुई ।इतना ही नही इसे भारत के एक अप्रतिम  मिसाल के तौर पर देखा जा रहा था।  पर ऐसा क्या हुआ कि जिस प्रतिमा को भारत के गौरवपूर्ण इतिहास का नवीनतम उदाहरण  समझा गया था वही आज निंदा का कारण बन गया और ऐसी निंदा भारत की संस्कृति में कहाँ तक उचित है? क्या है...

राखीगढ़ी की खुदाई से लगा आरएसएस और हिंदुत्व को बड़ा झटका

हिन्दुस्तान के कई नामों में से एक नाम आर्यावर्त भी है। आर्यावर्त का शाब्दिक अर्थ पृथ्वी के एक ऐसे भूभाग से है जो आर्य लोगों से जुड़ा हो। वर्तमान में ये भूभाग सिर्फ भारत ही है जबकि आजादी से पहले का सम्पूर्ण भारतवर्ष आर्यप्रदेश के नाम से जाना जाता था। चाहे वह पाकिस्तान हो या बांग्लादेश आदि। इतिहासविदों की माने तो आर्य भारत के मूल निवासी नही थे। इतिहासविदों की माने तो आर्य भारत के मूल निवासी नही थे। हरियाणा के हिसार   जिले में स्थित राखीगढ़ी से मिला ४५०० वर्ष पुराना नर कंकाल  आर्य पोलैंड से इंडोनेशिया तक रहनेवाले एक खानाबदोश समुदाय से संबंधित है जो समयकाल में भारत के उत्तरी भाग में सबसे पहले प्रवेश किये और धीरे धीरे पूर्वी और पशिमी भागों में फैले और अपने आप को विकसित किया। इसी सभयता के दो प्रमुख नगर हुए जिसके समाप्ति की कहानी बड़ी रहस्यमयी है। आजतक इतिहासविद इसके नष्ट होने में कोई एक ठोस या मान्य निष्कर्ष पर नहीं पहुँच पाए हैं यानी यूं कहें कि इतिहासकारों के मत में भिन्नता है। चाहे जो भी हो पर यह सत्य है कि रेडियोकार्बन  c14  जैसी नवीन विश्लेषण-पद्धति के अन...

इन्टरनेट के जन्मदाता टीम बर्नर्स ली ने किया चौकाने वाला ऐलान

सभ्यता के विकास के क्रम में कई नामचीन अविष्कारों ने क्रांतिकारी पहल कर हमारे जीवन में आमूलचूल परिवर्तन किये और हमारी रोजमर्रे की जिंदगी को और भी सुगम और आसान बना दिया. इसी क्रम में 90 के दशक में टीम बर्नर्स ली द्वारा  WWW की शुरुववात की गयी.  जी हाँ, आपने सही समझा, ये www वही है जिसे आप इन्टरनेट के नामे से जानते हैं . WWW का पूरा नाम वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web ) है. यह वही वेब है जिसके माध्यम से आप इस आर्टिकल को पढ़ पा रहे हैं, यूट्यूब पर गाने देख रहे हैं, वाट्सएप्प पर रियल टाइम चैट कर पा रहे हैं, स्काइप या आइमो पर वीडियो कालिंग कर रहे हैं  इत्यादि . The Father of Internet or WWW Tim Berners Lee announced radical change SOLID in web technology लेकिन आखिर हुआ, की इतने पॉपुलैरिटी और लोगों को सुविधाए देने के बाद भी, इन्टरनेट के पिता टीम बर्नर्स ली को इतना सख्त कदम  उठाना पड़ा. बात दरअसल यह है हरेक व्यवसाय की भांति की तरह तकनिकी क्षेत्र, खासकर कंप्यूटर क्षेत्र में भी कालाबाजारी  शुरू हो चुकी है. हम सब कुछ समय पहले भारत और कई देशों में चले ताबड़तो...

भारतीय कृषि : समस्या और समाधान

An essay on the 'Problems and Solution of Indian Agriculture' "भारत एक कृषि प्रधान देश है "  अक्सर कृषि लेखों (Essays on Agriculture) की शुरुआत इसी वाक्य से होती है. ग्रंथों में कहा गया है  ' अन्नम वै प्राणिनां प्राणः  ' ( अन्न प्राणियों का जीवन है अर्थात प्राण है।  प्राण ही जीवन एवं जीवन ही प्राण होता है।  प्राण नहीं तो जीवन नहीं। ) और हमसब इस तथ्य से भली भांति परिचित हैं। अन्न को उगाने की कला का नाम ही कृषि है. कृषि एक विज्ञान है जिसमे फसल को उगाने से लेकर उसके बाज़ारीकरण तक का सूक्ष्म ज्ञान निहित है. इसी विज्ञानं को जानने, समझने और उसके व्यवहारिक प्रयोग का अनवरत साधना का काम करने वाले किसान कहलाते हैं।   रोज़मर्रे की झंझावातों के साथ प्राकृतिक आपदाओं-विपदाओं से दो हाथ कर हमारे लिए दो वक़्त के निवाले का जुगाड़ करने वाले ये किसान हमारे समाज का अतिमहत्वपूर्ण अंग है।  यूँ कहे की, हमारे जीवन की प्राणवायु शक्ति को चलायमान रखने के एक महत्वपूर्ण कारक को निष्ठापूर्वक पालन करनेवाले ये किसान है.  राजनितिक व्यंग के लिए पढ़ें : हैप्पी बर्थडे मो...