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हार्दिक, कन्हैया, जिग्नेश, शेहला जैसे फ्लॉप चेहरे के बाद अब बारी टिकैत की - दी सिनिकल माइंड

नेता वो होता है जिसका जनाधार हो, जो पलटी ना मारे, जिसका सार्वजनिक जीवन और चरित्र साफ हो। हमारे यहाँ हर साल-छः महीने में एक नया नेता पैदा लेता है जिसे देख लगता है कि अबकी बार ये बाजी पलट देगा लेकिन हकीकत इसके उलट है। 2015 में एकबारगी ऐसा लगा कि हार्दिक पटेल एक मज़बूत कम्युनिटी का मसीहा बन जाएगा...लेकिन क्या हुआ ? उसी तरह साल 2016 में JNU के बीहड़ों से निकले कन्हैया कुमार मज़दूरों और दबे-कुचलों के सारे दुख-दर्द दूर कर देगा ..लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात ।   लेकिन सिलसिला यहीं नही थमा और 2017 में गुजरात मे दंगे कराकर मशहूर हुए जिग्नेश मेवानी जिसे एक बारगी फिर दलितों के मसीहा के तरह देखा गया और लोग सोचने लगे कि अब दलित वोट कंसॉलिडेट हो जायेगे ..पर क्या ऐसा हुआ ? और फिर 2018 -19 में दो क्रांतिकारी नाम आये शेहला राशिद और शाह फैसल जिसे छात्रों और मुसलमानों का एक नया प्रतीक समझ गया ..लेकिन यह केवल प्रतीकात्मक ही रहा.. ये  दोनों भी अति महत्वाकांक्षा के चक्कर मे न घर के बचे न घाट के ... और पढ़ें -  काशी का अस्सी  हे ताड़िका ! हमें ताड़ो। हमें निहारो।।  भारतीय कृषि...

गणतंत्र दिवस के परेड में दिखेगा राम मंदिर की झाँकी

ऊपर जवान हैं, नीचे किसान हैं! ऊपर राफेल है जिससे भ्रष्टाचार वाली बदबू आती हैं, नीचे है ट्रैक्टर जिससे पसीने की खुशबू आती है ! ऊपर तिरंगे के तीन रंग छोड़ते हुए वायुयान हैं जिसका इस्तेमाल इस देश का प्रधानमंत्री चुनाव जीतने के लिए भी कर लेता है.. तो नीचे ट्रैक्टर से निकलता हुआ काला धुआँ है जो किसानों के खून से बने ईंधन के जलने के बाद निकलता है! वहां संविधान की रक्षा की कसमें खाई जा रहीं हैं तो यहां किसान एक नया संविधान लिखने की तैयारी में हैं ! ऊपर मिराज के फाइटर्स हैं तो नीचे इस ठंड में अकड़े किसान ! छोड़िए ! ऊपर स्कोडा है या नीचे लहसुन ...  हमें क्या..कल का छुट्टी एन्जॉय करेंगे। सुने हैं कल वाले परेड में बनने वाली राम_मंदिर का भी झांकी दिखाया जाएगा..ऊपर से मंगलवार हनुमान जी का दिन ..दिन शुभ जाएगा !  आपका भी दिन शुभ हो ।। जय श्री राम  🙏

सबरी के राम भीमट के नाम

प्रभु श्रीराम को संप्रदायिकता के चश्मे से देखने वाले अक्सर भूल जाते हैं की उनसे बड़ा सामाजिक समसरता का उदाहरण पूरी दुनिया में नहीं है। सबरी के झूठे बेर खाए, केवट के साथ नदी पार किया। वनवासी, गिरवासी के साथ ना केवल युद्ध लड़े बल्कि उन्हें मित्र का दर्जा भी दिया... सबरी के गुरु #मतंगऋषि के देह त्यागने के बाद एक दिन सबरी आश्रम के पास तालाब में जल लेने गई तो पास ही बैठे तपस्या कर रहे ऋषि ने अछूत कह उनपर एक पत्थर मारा और उसकी चोट से बहते रक्त  की बूंदे से तालाब का सारा पानी रक्त में बदल गया यह देखकर संत शबरी को बुरा भला कहकर चिल्लाने लगा.  ऋषि ने बहुत जतन किए लेकिन वो तालाब में भरे रक्त को जल नहीं बना पाया. उसने उस में गंगा, यमुना सभी पवित्र नदियों का जल डाला  लेकिन रक्त जल में नहीं बदला. कई वर्षों बाद जब भगवान श्री राम #सीता_हरण के बाद उनकी खोज में वहां आए तब वहां के लोगों ने भगवान राम को बुलाया और आग्रह किया कि अपने चरणों के स्पर्ष  से इस तालाब के रक्त को पुनः जल में बदल दें. भगवान  रामजी ने भी ट्राई किया लेकिन कुछ हुआ नहीं.. . . .       ...

पंजाब चला बंगाल की राह : वामपंथ प्रो+

तुम्हारे टावर उखाड़ने से जियो को कुछ ही हजार का नुकसान होगा..कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ेगा #अम्बानी को, लेकिन जिस दिन उसने पंजाब-हरियाणा से अपने धंधे और टावर उखाड़ने शुरू किए तो तुम्हें उन्हें वापस लगवाने के लिए फिर आंदोलन करना पड़ेगा.. याद रखना. आज से साठ-सत्तर साल पहले बंगाल में मुंबई से ज्यादा रौनक थी ।  कोलकाता समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का केंद्र था और साथ ही विभिन्न संस्कृतियों का भी। ये बौद्धिकों, कलाकारों, फ़िल्म जगत से जुड़े लोगों का  भी  पसंदीदा स्थान था।    कोलकाता में तब भारत की टॉप 5 कंपनियों में से तीन बिड़ला, जेके, थापर के मुख्यालय थे। टाटा मुम्बई से कोलकाता शिफ्ट होने वाले थे, इसके लिए टावर भी बना लिया था।   और आज पंजाब में जो कुछ हो रहा है जैसे कृषि सुधारों को लेकर आंदोलन ,जिओ के टावर तोड़ने ,अंबानी अडानी को पंजाब में न घुसने देने की धमकियां दी जा रही है। कभी बंगाल में भी इसी तरह की घटनाएं घटी थी। और बंगाल ने अपनी समृद्धि से लेकर सांस्कृतिक पहचान को गवां बैठा । वही सब आज पंजाब जैसे समृद्ध और धनी राज्य में हो रहा है। इस क्रम की एक फेमस...

राम नाम की लूट है , लूट सको तो लूट !

 मौत आएगी, वह हमेशा आती है। तुम्हारे न चाहते हुए भी वह आती है। तुम्हें उससे जाकर मिलने की जरूरत नहीं है, वह अपने आप आ जाती है, लेकिन विश्वास करो तुम अपने जीवन को बुरी तरह से मिस करोगे।   ओशो कहते हैं - " मैं तुम्हे असली सूइसाइड सिखाऊंगा। बस संन्यासी बन जाओ। वैसे भी साधारण सूइसाइड करने से कुछ ख़ास होने वाला भी नहीं है। क्या फायदा, तुम एक दरवाज़े से निकलते हो और किसी दूसरे दरवाजे से फिर अंदर आ जाते हो। तुम इतनी आसानी से नहीं जा सकते। मैं तुम्हें असली आत्महत्या करना सिखाऊंगा, तुम हमेशा के लिए जा सकते हो। हमेशा के लिए जाना ही तो बुद्ध बन जाना है..." इस्लाम और सनातन गुलाबो का प्यार जिसने खुद जीवन से प्यार नहीं किया वो तुम्हें कुछ नहीं दे सकता . साधु बन जाना सबके बस की बात नहीं. हाँ सड़ाधु बन सकते हो । वैसे भी राजनीतिज्ञों की नज़र में #रामपाल और #रामरहीम भी संत ही था.. ' राम नाम की लूट है लूट सको तो लूट ..' और बाबाओं ने ही राम को लूट-लूट के कंगाल बना दिया ।। किसान आंदोलन से दुखी बाबा #रामसिंह ने अपनी पिस्टल से खुद को गोली मारी।  बाबा परलोक पहुंच चुके हैं ..बाबा को कुछ डर था ...

इस्लाम और सनातन

"वैद" का नाम   आते ही शाहजहां को "वेद" सुनाई पड़ता था इसी बहरेपन के लिए तो औरंगजेब ने शाहजहां को बंदी बना लिया...बुढऊ सुनता कुछ और बोलता कुछ और था... आगे पढ़िए   लोग कह रहे हैं कि अगर शाहजहां ने अस्पताल बनवाये होते तो मुमताज़ नहीं मरती...अरे भाई! उस समय वैद -हकीम टाइप लोग होते थे 'डॉक्टर्स' नहीं जो हस्पतालों में नौकरी करते ।  और हकीम तक तो ठीक भी था लेकिन वैद का नाम आते ही शाहजहां को "वेद" सुनाई पड़ता था इसी बहरेपन के लिए तो औरंगजेब ने शाहजहां को बंदी बना लिया। बुढऊ सुनता कुछ और बोलता कुछ और था... और तो और बेचारा शाहजहां को बंदी भी बनाया तो अपनी महबूबा से दूर #आगरा_फोर्ट में रख दिया... क्या है ना प्यार से इस्लाम थोड़ी न चलता है भाई । मोहम्मद साब कतई बुड़बक थे जो प्यार का संदेश दे दिए...अगर मोहम्मद सच में ईश्वर के पैगम्बर थे तो जाहिर है कि उन्होंने 'काफ़िर' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया होगा अगर वो करते हें  तो पैगम्बर के लायक नहीं हैं.. क्योंकि अल्लाह हो या ईश्वर, की अवधारणा किसी को भी 'दूसरा' और 'नालायक' नहीं मानती, मारने...

राम एक विदेशी आक्रमणकारी थे !

किताबें सभ्यता की वाहक हैं। किताबों के बिना इतिहास मौन है, साहित्य गूंगा हैं, विज्ञान अपंग हैं, विचार और अटकलें स्थिर है। ये परिवर्तन का इंजन हैं, विश्व की खिड़कियां हैं, समय के समुद्र में खड़ा प्रकाशस्तंभ हैं।"  - बारबरा डब्ल्यू तुचमन  तो वहीं जोसेफ एडिसन का मानना है कि , " पुस्तकें वह विरासत हैं जो मानव जाति के लिए एक महान प्रतिभा छोड़ती हैं, जो पीढ़ी से पीढ़ी तक उन लोगों तक पहुंचाई जाती हैं, जो अभी तक जन्मे नही हैं।"  भारतीय सभ्यता संस्कृति से हम भले ही अनजान बने रहे लेकिन दुनिया भारत को जानती है , पढ़ती है, मनन करती है। हमारे लोभ और गंदी राजनीति की अंधी दौड़ ने सबसे अगर किसी चीज़ को ज़्यादा प्रभावित किया है तो वह "भारतीय सभ्यता-संस्कृति" ।  संविधान के पहले प्रति में भी "श्री राम" अंकित हैं लेकिन ममता सरकार को यह नहीं दिखता। क्योंकि ,पश्चिम बंगाल में, छठी कक्षा की पाठ्य पुस्तक कहती है कि राम एक विदेशी थे, जिन्होंने भारत पर आक्रमण किया .. और अंग्रेजी शब्द Roaming की उत्पत्ति Rama से हुई है तथा इसका मूल भारतीय राक्षस है। पता है क्यों?  क्योंकि...

गुलाबो का प्यार

लगातार सात दिन चले, बाबा वैलेंटाइन का त्यौहार इस बार भी ख़तम हो गया. गुलाब की आशा पाले ठलवे अपने पैरों में काँटों का दर्द लिए दारु और चखने के साथ वापिस बैक टू पबिलियन हो चुके हैं.  कईयों का मानना है कि मोदी जी के 'बेटी पढाओ, बेटी बचाओ' आन्दोलन को उनके होने वाले सास ससुर ने गंभीरता पूर्वक नहीं लिया नहीं तो उनको ये दिन देखना नहीं पड़ता . उनके साथ भी उनकी गुलाबो होती. खैर गुलाबो तो मिली पर फिल्म 'मटरू की बिजली का मनडोला' में जो पंकज कपूर को मिली थी, वो वाली .  गुलाबो के नशे में चूर भैया के पाँव तो लडखडा रहे थे लेकिन आवाज़ में उतना ही जोश था , हौसले अब भी बुलंद थे . यकीन  मानिये,  भारत सरकार भैया को अगर बॉर्डर पर भेज देते तो बार्डर पार के लोगों का पैंट गीला कर आते. Gulabo Ka Pyar   ऐसी बात नहीं है कि भैया दौड़ नहीं लगाए थे . मैट्रिक की परीक्षा पास करते ही भैया भोरे-भोरे नद्दी किनारे रोजीना तीन चक्कर मारते थे जैसे गणेश जी अपने पप्पा-मम्मी का चक्कर लगाये थे .  खूब पसीना बहाए लेकिन  उसी के साथ उनका नौकरी पाने का लक भी बह गया. लेट लतीफे वाली स...

दिल्ली चुनाव 2020

परों को खोल , ज़माना उड़ान देखता है । ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है ।।   दिल्ली की सर्दी भले ही हड्डी गला देती हो लेकिन इसकी राजनीति देश को गर्म रखती है। भारत के अंदर अनवरत रूप से बहने वाली ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है दिल्ली।  साल 1911 के इसी दिसंबर महीने में 'एम्परर ऑफ इंडिया ' जॉर्ज पंचम और क्वीन मेरी ने 'दिल्ली दरबार' में यह पहली बार ऐलान किया कि ब्रिटीश सरकार के अधीन भारतीय प्रान्तों की राजधानी कलकत्ता से ट्रांसफर कर दिल्ली लाया जाएगा क्योंकि कलकत्ता में हो रहे नेशनलिस्ट मुबमेंट्स ने अंग्रेजों के नाकों में दम कर रखा था , हाथ से भारत निकलता जा रहा था । और फाइनली फरवरी 1931 में दिल्ली भारत की राजधानी बन गयी।। चौधरी ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बने। तबसे लेकर आजतक दिल्ली ने कई रंग देखे और बिखेरे। ये वही दिल्ली है जहाँ 2014 में मोदी लहर भी असर नहीं कर पाई। ये बात सच है कि नरेंद्र मोदी एक करिश्माई व्यक्तित्व के धनी हैं जिसने लोगों के दिलों में जगह बनाई लेकिन केजरीवाल ने दिल्लीवासियों के दिमाग में।  व्यक्ति का तुनात...

जीनियसों का जीनयस वशिष्ठ नारायण

वशिष्ठ नारायण (Vashishtha Narayan Singh) अब स्वर्गीय हो चुके हैं। हालाकि इनका जीवन अधिकतर गुमनामी में बीता | फिर भी , कुछ महीनों से अपनी लाचारगी, सरकारी लापरवाही और बीमारी के कारण फेसबुक, ट्विटर आदि जैसे सोशल मीडिया पर छाए हुए थे । अपनी जवानी में 'वैज्ञानिक जी' के नाम से मशहूर  वशिष्ठ नारायण सिंह पिछ्ले ४० वर्षों से मानसिक बिमारी सिजोफ्रेनिया (मनोविदलता) से पीड़ित थे . वशिष्ठ नारायण अपने भाई के साथ  वशिष्ठ नारायण का प्रारंभिक जीवन : इनका जन्म  2 April 1942 को बिहार के भोजपुर जिले के बसंतपुर गाँव में हुआ था . इनके पिता लाल बहादुर सिंह पुलिस विभाग में कांस्टेबल थे और माँ लह्सो देवी घर के काम काज संभालती थी . #वशिष्ठ_नारायण  बचपन से प्रतिभाशाली थे . पटना साइंस कॉलेज में बतौर छात्र गलत पढ़ाने पर अपने गणित के अध्यापक को बीच में ही टोक देते थे . जब यह बात कॉलेज के प्राध्यापक को पता चला तो इनकी अलग से परीक्षा ली गयी जिसमे उन्होंने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले . और पढ़ें -  काशी का अस्सी  हे ताड़िका ! हमें ताड़ो। हमें निहारो।।  भारतीय कृषि : समस्य...

पूंजीवाद का पर्स

आखिरकार प्रधान सेवक  के भतीजी की चोरी हुई बैग मिल गयी। इस खतरनाक आपरेशन को दिल्ली के 700 जवानों द्वारा 24 घंटे के भीतर सम्पन्न किया गया। वैसे,  महीने दिन पहले भीड़-भाड़ वाले इलाके CP में गनपॉइंट पर सामान लूट लिए गए लेकिन FIR वाली फ़ाइल दूसरी टेबल पर नहीं पहुंच पाई, दो साल से ऊपर हो गए नजीब को JNU से गायब हुए और कहानी ठंडे बस्ते में , सिर्फ दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में छोटे-मासूम बच्चों के अपहरण (किडनी गैंग) का अगर डेटा देखेंगे तो दिमाग झन्ना जाएगा । फेहरिश्त लंबी है ऐसी कहानियों की जिन्होंने बिना उपचार के ही दम तोड़ दी। लेकिन  PM के समबन्धियों का सामान सही सलामत वापिस आ गया इससे ज़्यादा ख़ुशी की बात क्या हो सकती ै। ये पर्स वाला मामला भले नया हो लेकिन इतिहास में थोड़ा पीछे जाएं तो ये आपको और चौकायेगा। ऐसी कई घटनाएं हुयी जिसमे समाज और सामाजिक व्यवस्था को दरकिनार करते हुए एक खास लोगों पर केंद्रित रही और यह अनवरत है।  ये ख़ास लोग अपनी सुख -सुविधाओं के अनुसार कानून बनाते है और समय समय पर इसमें परिवर्तन भी। रोमन साम्राज्य को अगर आप पढ़ेंगे तो जानेंगे की एक र...