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Showing posts from 2020

पंजाब चला बंगाल की राह : वामपंथ प्रो+

तुम्हारे टावर उखाड़ने से जियो को कुछ ही हजार का नुकसान होगा..कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ेगा #अम्बानी को, लेकिन जिस दिन उसने पंजाब-हरियाणा से अपने धंधे और टावर उखाड़ने शुरू किए तो तुम्हें उन्हें वापस लगवाने के लिए फिर आंदोलन करना पड़ेगा.. याद रखना. आज से साठ-सत्तर साल पहले बंगाल में मुंबई से ज्यादा रौनक थी ।  कोलकाता समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का केंद्र था और साथ ही विभिन्न संस्कृतियों का भी। ये बौद्धिकों, कलाकारों, फ़िल्म जगत से जुड़े लोगों का  भी  पसंदीदा स्थान था।    कोलकाता में तब भारत की टॉप 5 कंपनियों में से तीन बिड़ला, जेके, थापर के मुख्यालय थे। टाटा मुम्बई से कोलकाता शिफ्ट होने वाले थे, इसके लिए टावर भी बना लिया था।   और आज पंजाब में जो कुछ हो रहा है जैसे कृषि सुधारों को लेकर आंदोलन ,जिओ के टावर तोड़ने ,अंबानी अडानी को पंजाब में न घुसने देने की धमकियां दी जा रही है। कभी बंगाल में भी इसी तरह की घटनाएं घटी थी। और बंगाल ने अपनी समृद्धि से लेकर सांस्कृतिक पहचान को गवां बैठा । वही सब आज पंजाब जैसे समृद्ध और धनी राज्य में हो रहा है। इस क्रम की एक फेमस...

राम नाम की लूट है , लूट सको तो लूट !

 मौत आएगी, वह हमेशा आती है। तुम्हारे न चाहते हुए भी वह आती है। तुम्हें उससे जाकर मिलने की जरूरत नहीं है, वह अपने आप आ जाती है, लेकिन विश्वास करो तुम अपने जीवन को बुरी तरह से मिस करोगे।   ओशो कहते हैं - " मैं तुम्हे असली सूइसाइड सिखाऊंगा। बस संन्यासी बन जाओ। वैसे भी साधारण सूइसाइड करने से कुछ ख़ास होने वाला भी नहीं है। क्या फायदा, तुम एक दरवाज़े से निकलते हो और किसी दूसरे दरवाजे से फिर अंदर आ जाते हो। तुम इतनी आसानी से नहीं जा सकते। मैं तुम्हें असली आत्महत्या करना सिखाऊंगा, तुम हमेशा के लिए जा सकते हो। हमेशा के लिए जाना ही तो बुद्ध बन जाना है..." इस्लाम और सनातन गुलाबो का प्यार जिसने खुद जीवन से प्यार नहीं किया वो तुम्हें कुछ नहीं दे सकता . साधु बन जाना सबके बस की बात नहीं. हाँ सड़ाधु बन सकते हो । वैसे भी राजनीतिज्ञों की नज़र में #रामपाल और #रामरहीम भी संत ही था.. ' राम नाम की लूट है लूट सको तो लूट ..' और बाबाओं ने ही राम को लूट-लूट के कंगाल बना दिया ।। किसान आंदोलन से दुखी बाबा #रामसिंह ने अपनी पिस्टल से खुद को गोली मारी।  बाबा परलोक पहुंच चुके हैं ..बाबा को कुछ डर था ...

इस्लाम और सनातन

"वैद" आते ही शाहजहां को "वेद" सुनाई पड़ता था इसी बहरेपन के लिए तो औरंगजेब ने शाहजहां को बंदी बना लिया...बुढऊ सुनता कुछ और बोलता कुछ और था... आगे पढ़िए ...... ****......****.... अब लोग कह रहे हैं कि अगर शाहजहां ने अस्पताल बनवाये होते तो मुमताज़ नहीं मरती...अरे भाई उस समय वैद -हकीम टाइप लोग होते थे 'डॉक्टर्स' नहीं जो हस्पतालों में नौकरी करते ।  और हकीम तक तो ठीक भी था लेकिन वैद आते ही शाहजहां को "वेद" सुनाई पड़ता था इसी बहरेपन के लिए तो औरंगजेब ने शाहजहां को बंदी बना लिया...बुढऊ सुनता कुछ और बोलता कुछ और था...और तो और बेचारा शाहजहां को बंदी भी बनाया तो अपनी महबूबा से दूर #आगरा_फोर्ट में रख दिया... क्या है ना प्यार से #इस्लाम थोड़ी न चलता है भाई #मोहम्मद साब कतई बुड़बक थे जो प्यार का संदेश दे दिए...अगर मोहम्मद सच में ईश्वर के पैगम्बर थे तो जाहिर है कि उन्होंने #काफ़िर शब्द का इस्तेमाल नहीं किया होगा अगर वो करते हें  तो पैगम्बर के लायक नहीं हैं..क्योंकि अल्लाह हो या ईश्वर, की अवधारणा किसी को भी 'दूसरा' और 'नालायक' नहीं मानती...मारन...

ये मुफ्त है

जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। नोबेल विजेता #डेसमंड_टुटू ने एक बार कहा था कि ‘जब मिशनरी अफ्रीका आए, तो उनके पास बाईबल थी, और हमारे पास जमीन। उन्होंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं।’ हमने आखें बंद कर लीं...जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी, और उनके पास हमारी जमीन।’ इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और हमारे पास आजादी और निजता थी। उन्होंनें कहा "ये मुफ्त है" । हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां। जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है।  “ज्ञान से शब्द समझ आते हैं, और अनुभव से अर्थ”।।

राम एक विदेशी आक्रमणकारी थे !

किताबें सभ्यता की वाहक हैं। किताबों के बिना इतिहास मौन है, साहित्य गूंगा हैं, विज्ञान अपंग हैं, विचार और अटकलें स्थिर है। ये परिवर्तन का इंजन हैं, विश्व की खिड़कियां हैं, समय के समुद्र में खड़ा प्रकाशस्तंभ हैं।"  - बारबरा डब्ल्यू तुचमन  तो वहीं जोसेफ एडिसन का मानना है कि , " पुस्तकें वह विरासत हैं जो मानव जाति के लिए एक महान प्रतिभा छोड़ती हैं, जो पीढ़ी से पीढ़ी तक उन लोगों तक पहुंचाई जाती हैं, जो अभी तक जन्मे नही हैं।"  भारतीय सभ्यता संस्कृति से हम भले ही अनजान बने रहे लेकिन दुनिया भारत को जानती है , पढ़ती है, मनन करती है। हमारे लोभ और गंदी राजनीति की अंधी दौड़ ने सबसे अगर किसी चीज़ को ज़्यादा प्रभावित किया है तो वह "भारतीय सभ्यता-संस्कृति" ।  संविधान के पहले प्रति में भी "श्री राम" अंकित हैं लेकिन ममता सरकार को यह नहीं दिखता। क्योंकि ,पश्चिम बंगाल में, छठी कक्षा की पाठ्य पुस्तक कहती है कि राम एक विदेशी थे, जिन्होंने भारत पर आक्रमण किया .. और अंग्रेजी शब्द Roaming की उत्पत्ति Rama से हुई है तथा इसका मूल भारतीय राक्षस है। पता है क्यों?  क्योंकि...

गुलाबो का प्यार

लगातार सात दिन चले, बाबा वैलेंटाइन का त्यौहार इस बार भी ख़तम हो गया. गुलाब की आशा पाले ठलवे अपने पैरों में काँटों का दर्द लिए दारु और चखने के साथ वापिस बैक टू पबिलियन हो चुके हैं.  कईयों का मानना है कि मोदी जी के 'बेटी पढाओ, बेटी बचाओ' आन्दोलन को उनके होने वाले सास ससुर ने गंभीरता पूर्वक नहीं लिया नहीं तो उनको ये दिन देखना नहीं पड़ता . उनके साथ भी उनकी गुलाबो होती. खैर गुलाबो तो मिली पर फिल्म 'मटरू की बिजली का मनडोला' में जो पंकज कपूर को मिली थी, वो वाली .  गुलाबो के नशे में चूर भैया के पाँव तो लडखडा रहे थे लेकिन आवाज़ में उतना ही जोश था , हौसले अब भी बुलंद थे . यकीन  मानिये,  भारत सरकार भैया को अगर बॉर्डर पर भेज देते तो बार्डर पार के लोगों का पैंट गीला कर आते. Gulabo Ka Pyar   ऐसी बात नहीं है कि भैया दौड़ नहीं लगाए थे . मैट्रिक की परीक्षा पास करते ही भैया भोरे-भोरे नद्दी किनारे रोजीना तीन चक्कर मारते थे जैसे गणेश जी अपने पप्पा-मम्मी का चक्कर लगाये थे .  खूब पसीना बहाए लेकिन  उसी के साथ उनका नौकरी पाने का लक भी बह गया. लेट लतीफे वाली स...

दिल्ली चुनाव 2020

परों को खोल , ज़माना उड़ान देखता है । ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है ।।   दिल्ली की सर्दी भले ही हड्डी गला देती हो लेकिन इसकी राजनीति देश को गर्म रखती है। भारत के अंदर अनवरत रूप से बहने वाली ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है दिल्ली।  साल 1911 के इसी दिसंबर महीने में 'एम्परर ऑफ इंडिया ' जॉर्ज पंचम और क्वीन मेरी ने 'दिल्ली दरबार' में यह पहली बार ऐलान किया कि ब्रिटीश सरकार के अधीन भारतीय प्रान्तों की राजधानी कलकत्ता से ट्रांसफर कर दिल्ली लाया जाएगा क्योंकि कलकत्ता में हो रहे नेशनलिस्ट मुबमेंट्स ने अंग्रेजों के नाकों में दम कर रखा था , हाथ से भारत निकलता जा रहा था । और फाइनली फरवरी 1931 में दिल्ली भारत की राजधानी बन गयी।। चौधरी ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बने। तबसे लेकर आजतक दिल्ली ने कई रंग देखे और बिखेरे। ये वही दिल्ली है जहाँ 2014 में मोदी लहर भी असर नहीं कर पाई। ये बात सच है कि नरेंद्र मोदी एक करिश्माई व्यक्तित्व के धनी हैं जिसने लोगों के दिलों में जगह बनाई लेकिन केजरीवाल ने दिल्लीवासियों के दिमाग में।  व्यक्ति का तुनात...

What is the secret of happiness and how to be happy ?

When life takes U-turn, it does not not mean something has gone wrong but honestly it asks you to turn yourself towards U(You). If we look at our lives closely we'll find most of our works are either done to please someone or get admiration from someone. This someone can be your boss, your family members, your friends, your loved ones etc. Often, our happiness is controlled by others knowingly or unknowingly. We have been seeking so hard, we have been trying so hard to get this, to feel it – perhaps we are missing just because we are trying? Maybe it is trying that keeps us away from happiness? Let us think over it, brood over it. Human being can be happy, more happy than the birds, more happy than the trees, more happy than the stars – because human has something which no tree, no bird, no star has. Human has consciousness.  But when we have consciousness then two alternatives are possible: either you can become unhappy or you can become happy. Then it is our own choice! ...