भारत मुख्य रूप से दो धड़ों में विभाजित है एक है अमीर का तबका और दूसरा है गरीब का। बीच वाले लोग कहीं भी किसी पटल पर नहीं दिखते । यह भारतीय राजनीति की समानांतर स्थिति है इन बीते सत्तर सालों में।हमेशा गरीबी और गरीबों की बात तो होती रही पर इसका ज्यादातर फायदा परोक्ष रूप से एक खास तबके को हुआ है।यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि बीते सात दशक में अमीर और अमीर बन गए हैं जबकि गरीबों की स्थिति बद से बदतर होती चली जा रही है। अगर हम समसामयिक राजनीति की तरफ एकबारगी सही से परीक्षण करें तो यह साफ साफ नजर आता है कि न तो पीएम मोदी और ना ही राहुल किसी एक धड़े(अमीर /गरीब) में अपने आपको रखना चाहते है। दोनों दुविधा में हैं। यही बात क्षेत्रीय दलों में भी देखने को मिलती है। दोनों बात करते हैं गरीबों के विकास की पर इनमें से किसी के पास भी 'क्लियर विज़न' नहीं है। स्पष्ट दृष्टि ही आपको अग्रसरित करती है। दूरदर्शिता के अभाव में आँख रहते भी ये अंधे हैं। वर्तमान परिवेश में यह राजनीति और ये राजनीतिज्ञ पंगु हैं। कॉंग्रेस के गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम सिर्फ एक दिखावा रहा जबकि बीजेपी का महज छलावा है। 20...