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Showing posts from September, 2017

दुविधा में भारत

भारत मुख्य रूप से दो धड़ों में विभाजित है एक है अमीर का तबका और दूसरा है गरीब का। बीच वाले लोग कहीं भी किसी पटल पर नहीं दिखते । यह भारतीय राजनीति की समानांतर स्थिति है इन बीते सत्तर सालों में।हमेशा गरीबी और गरीबों की बात तो होती रही पर इसका ज्यादातर फायदा परोक्ष रूप से एक खास तबके को हुआ है।यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि बीते सात दशक में अमीर और अमीर बन गए हैं जबकि गरीबों की स्थिति बद से बदतर होती चली जा रही है। अगर हम समसामयिक राजनीति की तरफ एकबारगी सही से परीक्षण करें तो यह साफ साफ नजर आता है कि न तो पीएम मोदी और ना ही राहुल किसी एक धड़े(अमीर /गरीब) में अपने आपको रखना चाहते है। दोनों दुविधा में हैं। यही बात क्षेत्रीय दलों में भी देखने को मिलती है। दोनों बात करते हैं गरीबों के विकास की पर इनमें से किसी के पास भी 'क्लियर विज़न' नहीं है। स्पष्ट दृष्टि ही आपको अग्रसरित करती है। दूरदर्शिता के अभाव में आँख रहते भी ये अंधे हैं। वर्तमान परिवेश में यह राजनीति और ये राजनीतिज्ञ पंगु हैं। कॉंग्रेस के गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम सिर्फ एक दिखावा रहा जबकि बीजेपी का महज छलावा है। 20...

हैप्पी बर्थडे मोदी जी

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। आप अच्छे वक्ता तो हैं ही, अच्छा श्रोता भी बनें। आप अपने मन की बात करते रहें तथा जन के मन की भी बात सुनें। आप दीर्घायु होवें। प्रधानमंत्री जी हिंदुस्तानी समाज पुरातन काल से सामरिक रहा है लेकिन बीच में कुछ बकलोल आये और हम बकलोली का शिकार बन गए ,फिर भी इन सबके बावजूद हम और हमारा गांव समसरता के आधार पर टिका रहा , आशावान हूँ कि इसे जस का तस रखा जाएगा। एक बार फिर हम नौजवान भारतवासियों की ओर से जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।        सर, सुने हैं कि बर्थडे के दिन कोय झूठ नय बोलता है। एकदम सच्ची-मुच्ची वाला प्रोमिस करता है। सर याद है ना आप बोले थे कि नौकरी का झड़ी लगा देंगे। सबको रोजगार देंगे। मन भर वैकेंसी निकालेंगे। पर यहाँ त खाली लुल्ल बटे सन्नाटा है। जो पैसा बाबूजी से तैयारी के लिए लेते थे, नोटबंदी कर उसका भी माय-बहिन एक कर दिए हैं। बचा-खुचा जो रक्खे थे खैनी-बीड़ी के लिए बैंकवा में वहाँ भी ₹5000 का मिनिमम बैलेंस रखने के लिए एम.टायरा और आर एस अग्रवाल का कैलकुलेशन कम पड़ रहा है। क्या है ना सर...

निकम्मी सरकार , दो के चार

बेकार, कामचोर व निकम्मा मंत्रालयों में से एक 'मिनिस्ट्री ऑफ वाटर रिसोर्स' (जल संसाधन मंत्रालय) के अंतर्गत 'नमामि गंगे' परियोजना है जो 2015 में बीस हजार (₹20000) करोड़ के बजट से शुरुवात की गई। इन 2 सालों में गंगा का कितना काया पलट हुआ प्रत्यक्ष रूप से हमारे सामने है। मुझे लगता है जितना पिछली सरकार अपने दस वर्षोँ में नही खाई, बीजेपी ने 2 साल में उससे ज्यादा खाया है। उमा भारती जैसे ढोंगी साध्वी ने भारत की जीवनदायनी गंगा का कह-कहकर बलात्कार किया। बेशक ये लोग 'मुँह में राम बगल में छुरी' जैसे मुहावरे को चरितार्थ करते हैं। और अब जब लोकसभा चुनाव  सामने है तो इनका मंत्रालय एक और खाऊ गडकरी को दिया गया है। गडकरी ने 3 साल में सड़कों का कितना विकास किया जो इनकी कार्य कुशलता को देख इन्हें एक और मंत्रालय दिया गया है? ये सारी चीजें एक निकम्मी सरकार की निशानी है। कागज पर काम नही होता साब, कल्पनाओं के अथाह समंदर में गोते लगाते केवल ओर केवल चित्र बनाये जा सकते हैं। बात छोटी सी है कि अगर बीजेपी सरकार चलाने में अक्षम है तो अपने आप को सरेंडर कर दे। कॉपी पेस्ट करना नकल कहलाता है सोच...

शिक्षक दिवस

एक शिक्षक राष्ट्रपति बन सकता है पर क्या आपने कभी राष्ट्रपति को शिक्षक बनते देखा है ? जवाब शायद नहीं होगा। आखिर क्यों? संदेह शिक्षा की पहली कड़ी है पर आज अगर  आप संदेह करोगे तो बेशक लतियाये जाओगे। ब्रह्मांड का सबसे मुश्किल काम आज सबसे आसान हो चला है और वो है 'शिक्षक बनना'। हर गली-नुक्कड़ पर ये प्रजाति आपको मुँह में गुटका दबाये घूमते मिल जायेंगे। मेरे खयाल से शिक्षक और तोता दोनों ही रट्टूमल हैं। ये पूर्णतया भरे हैं जिनमें सीखने और अन्वेषण की प्रवर्ति   खत्म हो चुकी है। समाज जबतक ऐसे शिक्षकों से भरा रहेगा इसका उनवान असम्भव है। फिर भी, कुछ अभी भी हैं आपको लालटेन लेकर तलाशना होगा। जिनको मिला हो ऐसा गुरु, ज़रूर आशीर्वाद लें। शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।