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Showing posts from February, 2020

गुलाबो का प्यार

लगातार सात दिन चले, बाबा वैलेंटाइन का त्यौहार इस बार भी ख़तम हो गया. गुलाब की आशा पाले ठलवे अपने पैरों में काँटों का दर्द लिए दारु और चखने के साथ वापिस बैक टू पबिलियन हो चुके हैं.  कईयों का मानना है कि मोदी जी के 'बेटी पढाओ, बेटी बचाओ' आन्दोलन को उनके होने वाले सास ससुर ने गंभीरता पूर्वक नहीं लिया नहीं तो उनको ये दिन देखना नहीं पड़ता . उनके साथ भी उनकी गुलाबो होती. खैर गुलाबो तो मिली पर फिल्म 'मटरू की बिजली का मनडोला' में जो पंकज कपूर को मिली थी, वो वाली .  गुलाबो के नशे में चूर भैया के पाँव तो लडखडा रहे थे लेकिन आवाज़ में उतना ही जोश था , हौसले अब भी बुलंद थे . यकीन  मानिये,  भारत सरकार भैया को अगर बॉर्डर पर भेज देते तो बार्डर पार के लोगों का पैंट गीला कर आते. Gulabo Ka Pyar   ऐसी बात नहीं है कि भैया दौड़ नहीं लगाए थे . मैट्रिक की परीक्षा पास करते ही भैया भोरे-भोरे नद्दी किनारे रोजीना तीन चक्कर मारते थे जैसे गणेश जी अपने पप्पा-मम्मी का चक्कर लगाये थे .  खूब पसीना बहाए लेकिन  उसी के साथ उनका नौकरी पाने का लक भी बह गया. लेट लतीफे वाली स...

दिल्ली चुनाव 2020

परों को खोल , ज़माना उड़ान देखता है । ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है ।।   दिल्ली की सर्दी भले ही हड्डी गला देती हो लेकिन इसकी राजनीति देश को गर्म रखती है। भारत के अंदर अनवरत रूप से बहने वाली ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है दिल्ली।  साल 1911 के इसी दिसंबर महीने में 'एम्परर ऑफ इंडिया ' जॉर्ज पंचम और क्वीन मेरी ने 'दिल्ली दरबार' में यह पहली बार ऐलान किया कि ब्रिटीश सरकार के अधीन भारतीय प्रान्तों की राजधानी कलकत्ता से ट्रांसफर कर दिल्ली लाया जाएगा क्योंकि कलकत्ता में हो रहे नेशनलिस्ट मुबमेंट्स ने अंग्रेजों के नाकों में दम कर रखा था , हाथ से भारत निकलता जा रहा था । और फाइनली फरवरी 1931 में दिल्ली भारत की राजधानी बन गयी।। चौधरी ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बने। तबसे लेकर आजतक दिल्ली ने कई रंग देखे और बिखेरे। ये वही दिल्ली है जहाँ 2014 में मोदी लहर भी असर नहीं कर पाई। ये बात सच है कि नरेंद्र मोदी एक करिश्माई व्यक्तित्व के धनी हैं जिसने लोगों के दिलों में जगह बनाई लेकिन केजरीवाल ने दिल्लीवासियों के दिमाग में।  व्यक्ति का तुनात...