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Showing posts from June, 2019

बिहार की अंधी सरकार के निकम्मेपन का नाम है चमकी बुखार

बिहार और चमकी बुखार का नाता थोड़ा पुराना है.  लेकिन एक और बात है जिसे आप भी अंगीकार करेंगे कि बिहार की अंधी सरकार के निकम्मेपन का नाम है चमकी बुखार (Chamaki Bukhar is a name of Bihar Govt's Insipidness). कठोपनिषद के नचिकेता-यमराज संवाद में आज नचिकेता (प्रश्न करेवाला ) खेल से गायब हो चुका है . अब वह प्रेत बन चुका है अगर नागार्जुन की माने तो। उनकी कविता 'प्रेत का बयान'' का एक अंश  है.. "ओ रे प्रेत -" कडककर बोले नरक के मालिक यमराज  -"सच - सच बतला ! कैसे मरा तू ? भूख से , अकाल से ? बुखार कालाजार से ?...  अगर बाबा नागार्जुन की जगह मैं होता तो कहता , " महाराज ! सच - सच कहूँगा  झूठ नहीं बोलूँगा  नागरिक हैं हम स्वाधीन भारत के  मुजफ्फरपुर  जिला है , सूबा बिहार में ...  ( पूरी  कविता यहां पढ़ें ) जी हाँ , १२० बच्चों को,  सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिर से मृतक की फेहरिश्तों में सजा दिए जायेंगे।  लेकिन क्या बात यहीं तक रूकती है ? ऐसे कई आंकड़ें हैं चमकी की , भारत खासकर बिहार के ...

हम फादर्स डे क्यों मनाते हैं ?

हम फादर्स डे क्यों मनाते हैं (Why do we celebrate Fathers'Day) ? वास्तव में यह अजीब सा प्रश्न है की हम Father's Day  अर्थात पिता दिवस क्यों मनाते हैं ? शुरू करते हैं पुराणों से, पुराण मतलब पुराना अर्थात जो बीत चुका  है लेकिंन अंग्रेजी के शब्द हिस्ट्री (History ) से यह  थोड़ा सा भिन्न है। जीवन का आविर्भाव युग्मों से होता है यानि की दो के मिलन से होता है। इसे इस प्रकार भी कह सकते हैं कि दो जीवों के आनंद के चरमोत्कर्ष  की प्रक्रिया ही नए जीवों का प्रतिपादन करते हैं.  हमारे अपने होने का भी श्रेय दो को ही जाता है जिसे हम आमतौर पर माता-पिता की संज्ञा देते हैं। माँ की महिमा का गुणगान चहुओर है पर पिता के बारे में  स्कंन्द पुराण के छठे अध्याय में लिखा है पिता स्वर्गः पिता धर्मः पिता परमकं तपः |  पितरि प्रीतिमापन्ने सर्वाः प्रीयन्ति देवताः || ''अर्थात , पिता ही स्वर्ग है , पिता ही धर्म और सबसे बडा तप है।  अगर पिता खुश है तो ईश्वर भी प्रसन्न होते हैं।" चलिए ये तो पुरानों में लिखा है जिसका हमें-आपको तनिक भी पता नहीं है...