दिल लगी ही दिल्लगी में दिल गया, दिल लगाने का नतीज़ा मिल गया मैं तो रोता हूँ कि मेरा दिल गया , तुम क्यों हँसते हो तुम्हें क्या मिल गया ।। इसी तरह दिल लगाते रहिये अपने काम में , अपने परिवार में और अपने आप में। आलोचनाएँ होती रही हैं और आगे भी रहेंगी। बिना नफा नुकसान सोचे, बस करते रहने की इस सतत प्रक्रिया को ही कृष्ण ने निष्काम कहा है। ब्रिटिश कवि रॉबर्ट ग्रेव ने लिखा है - "मृत्यु आने से पहले , जबकि वास्तव में मृत्यु आई नहीं होती, बच्चों को खेलते हुए देखते हैं। गुलाब, आसमान और ढोल की तरफ देखते हुए इसमें कोई शक नहीं कि हम पागल हो जायेंगे और इसी तरह हम मर जायेंगे।" डॉ कलाम इसे एक और तरीके से कहते हैं - " अगर हम लंबे समय तक जिंदा रहें और बीते समय की सभी बातों के बारे में सोचें, जैसे जीने लायक पहचान, एक घनिष्ठ और संतोषजनक मित्रता, बच्चों को जन्म देकर वंश-क्रम आगे बढ़ाएं तथा उनके पालन-पोषण में अपने संस्कार दें, तब भी एक कार्य रह जाता है । यह कार्य है , बीते समय की समस्त घटनाओं को जोड़कर एक अर्थपूर्ण कहानी बनाना और जीवन के अंतिम समय में अपने से यह समझौता करना कि हमने...