आजकल नए शब्द 'ब्राम्हणवाद' का चलन जोरों पर है। और ऐसे शब्दों ने ब्राह्मणों के अस्तित्व को चुनौती दे दी है। कभी कभी तो ऐसा लगा कि मैं एक बोझ हूँ इस धरती पर,कारण हमारे पूर्वज हैं। लेकिन आज जब समाज के हर वर्गों व उनकी प्राथमिकताओं पर सिलसिलेवार तरीके से अध्ययन करता हूँ तो एक साथ कई तथ्यों पर ध्यान अटकता है। समाजशात्र कि सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है समाज व उसके तौर तरीके को समझना एवम मनन करना। एक जाति विशेष होने के कारण नहीं पर 'पब्लिक सर्विस कमीशन' के तैयारी की एक होलिस्टिक सोच के कारण कह सकता हूँ कि, ब्राहमणो ने समाज को तोडा नही अपितु जोडा है। 1.ब्राहमण ने विवाह के समय समाज के सबसे निचले पायदान पर खडे हरिजन को जोड़ते हुये अनिवार्य किया कि हरिजन स्त्री द्वारा बनाये गये चुल्हेपर ही सभी शुभाशुभ कार्य होगे। इस तरह सबसे पहले हरिजन को जोडा गया ..... 2. धोबन के द्वारा दिये गये जल से से ही कन्या सुहागन रहेगी इस तरह धोबी को जोड़ा... 3.कुम्हार द्वारा दिये गये मिट्टी के कलश पर ही देवताओ के पुजन होगें यह कहते हुये कुम्हार को जोड़ा. 4. मुसहर जाति जो वृक्ष के पत्तो से पत्तल दोनिया...