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Showing posts from April, 2017

मैं कौन !

न मैं सत्य हूँ न असत्य हूँ ना ही मर्त्य मैं न अमर्त्य हूँ मैं ना पाप हूँ ना निष्पाप हूँ न वरदान ही न अभिशाप हूँ न जाऊँ नर्क में ना  स्वर्ग ही मेरा ना अंत है, न उत्सर्ग ही ना मैं जीत हूँ ना हार हूँ ना ही प्रकाश मैं, ना अंधकार हूँ।। मैं न सोच में न विचार में ना ही बोली और व्यवहार में ना ही युक्ति में न विरक्ति में मैं हूँ चेतना की शक्ति में मैं तरंग हूँ आनंद का आनंद ही प्रतिरूप है मैं ही साक्षी हूँ और साक्ष्य भी यह मेरा भव्य स्वरुप है। ।                                         : 'चन्दन गुंजन'